जया एकादशी व्रत कथा - Jaya Ekadashi Vrat Katha - Today Ekadashi

जया एकादशी व्रत कथा (Jaya Ekadashi Vrat Katha) 

जय श्री कृष्ण भक्तो, हमारे हिन्दू धर्म मे एकादशी व्रत की महिमा अलौकिक है, ये व्रत करनेसे भगवान विष्णु की प्रसन्ता के साथ अपने सभी पापो का नाश और सभी प्रकारके भौतिक सुख और समृद्धि देने वाला ये व्रत है, आइए जानते है आजके इस पोस्ट मे जया एकादशी व्रत की पौराणिक कथा (Jaya ekadashi vrat katha) पूरी सुनाने जा रहे है।

जया एकादशी व्रत कथा (Jaya Ekadashi Vrat Katha)

Jaya Ekadashi Vrat Katha

माघ मास के शुक्ल पक्ष की ग्यारस तिथि को जया एकादशी के नाम से जाना जाता है। जया एकादशी के दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को मोक्ष मिलता है और पिशाच योनि से मुक्ति मिलती है। यदि आप व्रत रखते हैं तो आपको जया एकादशी व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए।आज हम आपको जया एकादशी व्रत कथा के बारे में बता रहे हैं। 

जया एकादशी व्रत की पौराणिक कथा

एक समय नंदन वन में उत्सव का अयोजन हुआ, जिसमें सभी देव और ऋषि-मुनि शामिल हुवे। उस उत्सव में गंधर्व कन्याएं नृत्य कर रही थीं और गंधर्व गीत गा रहे थे। उनमें माल्यवान नाम का एक गंधर्व गायक और पुष्यवती नामकी एक नृत्यांगना थी। माल्यवान को देखकर पुष्यवती उस पर मोहित हो गई। वह माल्यवान को रिझाने लगी। माल्यवान पर उसका प्रभाव दिखाई देने लगा और वह सुर-ताल भूल गया। संगीत लयविहीन हो गया और उत्सव का आनंद फीका हो गया।

उत्सव में शामिल देवों को यह बात बुरी लगी। देवों के राजा इंद्र ने क्रोध में दोनों को श्राप दे दिया, जिसके परिणामस्वरूप दोनों स्वर्ग से पृथ्वी पर आ गए। मृत्यु लोक में हिमालय के जंगल में वे पिशाचों का जीवन व्यतीत करने लगे। वे अपने इस पिशाची जीवन से दुखी थे।

संयोगवश एक बार माघ शुक्ल की जया एकादशी को उन दोनों ने कुछ भी नहीं खाया। न ही कोई पाप कार्य किया। फल-फूल खाकर ही अपना गुजारा किया। ठंड में भूख से व्याकुल उन दोनों ने एक पीपल के पेड़ के नीचे पूरी रात व्यतीत की। उस दौरान उनको अपनी गलती का पश्चाताप भी हो रहा था। उन्होंने फिर ऐसी गलती न करने का प्रण लिया। सुबह होते ही दोनों के प्राण शरीर से निकल गए।

उन्हें मालूम नहीं था कि उस दिन जया एकादशी थी। अंजाने में ही उन्होंने जया एकादशी का व्रत कर लिया। भगवान विष्णु की कृपा से वे दोनों पिशाच योनि से मुक्त हो गए। वे फिर से अपने वास्तविक स्वरूप में आ गए और स्वर्ग चले गए। माल्यवान और पुष्यवती के पिशाच योनि से मुक्त हो कर स्वर्ग में आने से इंद्र आश्चर्यचकित हुए। उन्होंने दोनों से श्राप से मुक्ति के बारे में पूछा। तब दोनों ने जया एकादशी व्रत के प्रभाव को बताया।

उन्होंने कहा कि उनसे अनजाने में ही जया एकादशी का व्रत हो गया। भगवान विष्णु की कृपा से वे दोनों पिशाच यो​नि से मुक्त हो गए। इस तरह से ही जया एकादशी का व्रत करने से लोगों को अपने पाप कर्मों से मुक्ति मिलती है।

समापन - 

भक्तो, हमे आशा है की आपको हमारी ये पोस्ट Jaya ekadashi vrat katha पसंद आई होगी, यदि अभी आपके मन मे इस पोस्ट को लेकर आप चाहते है की इसमे कुछ सुधार की जरूरत है, तो  आप नीचे comments मे लिख सकते है। आपके इस सुजाव को हम तुरंत अनुकरण करके पोस्ट मे सुधार करेंगे। यदि आपको हमारा यह पोस्ट “जया एकादशी व्रत कथा” अच्छा लगा हो या इससे आपको कुछ सीखने को मिला हो तो, अपनी प्रसनता और उत्सुकता को दर्शाने के लिए कृपया इस पोस्ट को Social Media जैसे की Facebook, Twitter, Instagram और Whatsapp इत्यादिक पर Share जरूर कीजिए। धन्यवाद।

II जय श्री कृष्ण II  

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